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सुनन नसाई

नंबर 592

नंबर 592किताब 6, नंबर 99
أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ عُثْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ، عَنِ ابْنِ أَبِي حَمْزَةَ، ح وَأَنْبَأَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُغِيرَةِ، قَالَ حَدَّثَنَا عُثْمَانُ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - عَنْ شُعَيْبٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، قَالَ أَخْبَرَنِي سَالِمٌ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا أَعْجَلَهُ السَّيْرُ فِي السَّفَرِ يُؤَخِّرُ صَلاَةَ الْمَغْرِبِ حَتَّى يَجْمَعَ بَيْنَهَا وَبَيْنَ الْعِشَاءِ ‏.‏
It was narrated that Az-Zuhri said:"Salim told me that his father said: 'I saw the Messenger of Allah (ﷺ), when he was in a hurry to travel, delaying Maghrib so that he could combine it with 'Isha
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of the Times (of Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।