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सुनन नसाई

नंबर 583

नंबर 583किताब 6, नंबर 90
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْحَكَمِ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ زَيْدِ بْنِ مُحَمَّدٍ، قَالَ سَمِعْتُ نَافِعًا، يُحَدِّثُ عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنْ حَفْصَةَ، أَنَّهَا قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا طَلَعَ الْفَجْرُ لاَ يُصَلِّي إِلاَّ رَكْعَتَيْنِ خَفِيفَتَيْنِ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Umar that Hafsah said:"When the dawn appears, the Messenger of Allah (ﷺ) would only pray two short Rak'ahs
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of the Times (of Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।