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सुनन नसाई

नंबर 571

नंबर 571किताब 6, नंबर 78
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ، قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي قَالَ، أَخْبَرَنِي ابْنُ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذَا طَلَعَ حَاجِبُ الشَّمْسِ فَأَخِّرُوا الصَّلاَةَ حَتَّى تُشْرِقَ وَإِذَا غَابَ حَاجِبُ الشَّمْسِ فَأَخِّرُوا الصَّلاَةَ حَتَّى تَغْرُبَ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Umar said:"The Messenger of Allah (ﷺ) said: 'When the edge of the sun rises, then delay prayer until it has fully risen, and when the edge of the sun starts to set, delay prayer until it has fully set
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of the Times (of Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।