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सुनन नसाई

नंबर 501

नंबर 501किताब 6, नंबर 8
أَخْبَرَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ يَعْقُوبَ، قَالَ حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ حَفْصٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي ح، وَأَنْبَأَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ يَعْقُوبَ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مَعِينٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حَفْصٌ، ح وَأَنْبَأَنَا عَمْرُو بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ حَفْصِ بْنِ غِيَاثٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي، عَنِ الْحَسَنِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَوْسٍ، عَنْ ثَابِتِ بْنِ قَيْسٍ، عَنْ أَبِي مُوسَى، يَرْفَعُهُ قَالَ ‏ "‏ أَبْرِدُوا بِالظُّهْرِ فَإِنَّ الَّذِي تَجِدُونَ مِنَ الْحَرِّ مِنْ فَيْحِ جَهَنَّمَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Musa in a Marfu' [1] report:"Wait until it cools down to pray Zuhr, for the heat you experience is a breeze from Hell." [1] Meaning he attributed it to the Prophet (ﷺ)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of the Times (of Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।