सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 5530

नंबर 5530किताब 50, नंबर 103
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْخَلِيلِ، قَالَ حَدَّثَنَا مَرْوَانُ، - هُوَ ابْنُ مُعَاوِيَةَ - عَنْ عَلِيِّ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ، عَنْ عُبَادَةَ بْنِ مُسْلِمٍ الْفَزَارِيِّ، عَنْ جُبَيْرِ بْنِ أَبِي سُلَيْمَانَ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏"‏ اللَّهُمَّ ‏"‏ ‏.‏ فَذَكَرَ الدُّعَاءَ وَقَالَ فِي آخِرِهِ ‏"‏ أَعُوذُ بِكَ أَنْ أُغْتَالَ مِنْ تَحْتِي ‏"‏ ‏.‏ يَعْنِي بِذَلِكَ الْخَسْفَ ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Umar said:"The Prophet [SAW] used to say: 'Allahumma (O Allah,)' and he mentioned the supplication, and said at the end, 'A'udhu bika an ughtala min tahti (and I seek refuge with You from being swallowed up from beneath me)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।