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सुनन नसाई

नंबर 5526

नंबर 5526किताब 50, नंबर 99
أَخْبَرَنَا هَنَّادٌ، عَنْ أَبِي الأَحْوَصِ، عَنْ حُصَيْنٍ، عَنْ هِلاَلٍ، عَنْ فَرْوَةَ بْنِ نَوْفَلٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ اللَّهُمَّ إِنِّي أَ عُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّ مَا عَمِلْتُ وَمِنْ شَرِّ مَا لَمْ أَعْمَلْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that 'Aishah said:"The Messenger of Allah [SAW] used to say: 'Allahumma, inni a'udhu bika min sharri ma 'amiltu wa min sharri ma lam a'mal ba'd (O Allah, I seek refuge with You from the evil of what I have done and from the evil of what I have not done yet)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।