أَخْبَرَنَا يُوسُفُ بْنُ حَمَّادٍ، قَالَ حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ مَنْصُورٍ، عَنْ عَاصِمٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَرْجِسَ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا سَافَرَ يَتَعَوَّذُ مِنْ وَعْثَاءِ السَّفَرِ وَكَآبَةِ الْمُنْقَلَبِ وَالْحَوْرِ بَعْدَ الْكَوْرِ وَدَعْوَةِ الْمَظْلُومِ وَسُوءِ الْمَنْظَرِ .
It was narrated that 'Abdullah bin Sarjis said:"When the Prophet [SAW] traveled, he would seek refuge with Allah from the hardships of travel, and the sorrows of return, from loss after plenty, from the supplication of the one who has been wronged, and from seeing some calamity befall
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAbu Ghuddah
SahihAl-Albani
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।