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सुनन नसाई

नंबर 5489

नंबर 5489किताब 50, नंबर 62
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ مَسْعَدَةَ، عَنْ هَارُونَ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ مُحَمَّدٍ، عَنْ عُثْمَانَ بْنِ أَبِي الْعَاصِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَدْعُو بِهَذِهِ الدَّعَوَاتِ ‏ "‏ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكَسَلِ وَالْهَرَمِ وَالْجُبْنِ وَالْعَجْزِ وَمِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Uthman bin Abi Al-'As that:The Prophet [SAW] used to say supplication in these words: "Allahumma inni a'udhu bika minal-kasali, walharami, wal-jubni, wal-'ajzi, wa min fitnatil-mahya wal-mamat. (O Allah, I seek refuge in You from laziness, old age, cowardice, and incapacity, and from the trials of life and death)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।