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सुनन नसाई

नंबर 5485

नंबर 5485किताब 50, नंबर 58
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَمْرِو بْنِ السَّرْحِ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي سَالِمُ بْنُ غَيْلاَنَ، عَنْ دَرَّاجٍ أَبِي السَّمْحِ، عَنْ أَبِي الْهَيْثَمِ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ كَانَ يَقُولُ ‏"‏ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكُفْرِ وَالْفَقْرِ ‏"‏ ‏.‏ فَقَالَ رَجُلٌ وَيَعْدِلاَنِ قَالَ ‏"‏ نَعَمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Sa'eed Al-Khudri that:The Messenger of Allah [SAW] used to say: "A'udhu billahi minal-kufri wal-faqr. (O Allah, I seek refuge with You from Kufr and poverty.)" A man said: "Are they equal?" He said: "Yes
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।