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सुनन नसाई

नंबर 5476

नंबर 5476किताब 50, नंबर 49
أَخْبَرَنَا أَحْمَدُ بْنُ حَرْبٍ، قَالَ حَدَّثَنَا الْقَاسِمُ، وَهُوَ ابْنُ يَزِيدَ الْجَرْمِيُّ عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ، أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ أَبِي عَمْرٍو، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ وَالْكَسَلِ وَالْبُخْلِ وَالْجُبْنِ وَضَلَعِ الدَّيْنِ وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Anas bin Malik said:"The Prophet [SAW] used to say: 'Allahumma inni a'udhu bika minal-hammi wal hazani, wal-kasali, wal-bukhli, wal-jubni, wa dala'id-dain, wa ghalabatir-rijal (O Allah, I seek refuge with You from worry, grief, laziness, miserliness, cowardice, difficult debt and being overpowered by men)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।