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सुनन नसाई

नंबर 5473

नंबर 5473किताब 50, नंबर 46
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبِي قَالَ، حَدَّثَنَا حَيْوَةُ، وَذَكَرَ، آخَرَ قَالَ حَدَّثَنَا سَالِمُ بْنُ غَيْلاَنَ التُّجِيبِيُّ، أَنَّهُ سَمِعَ دَرَّاجًا أَبَا السَّمْحِ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا الْهَيْثَمِ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا سَعِيدٍ، يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏"‏ أَعُوذُ بِاللَّهِ مِنَ الْكُفْرِ وَالدَّيْنِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ رَجُلٌ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَتَعْدِلُ الدَّيْنَ بِالْكُفْرِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ نَعَمْ ‏"‏ ‏.‏
Abu Sa'eed said:"I heard the Messenger of Allah [SAW] say: 'A'udhu billahi minal-kufri wad-dain. (I seek refuge with Allah from Kufr and debt.)' A man said: 'O Messenger of Allah, are you equating debt with Kufr?' The Messenger of Allah [SAW] said: 'Yes
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।