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सुनन नसाई

नंबर 5471

नंबर 5471किताब 50, नंबर 44
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عُثْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا بَقِيَّةُ، قَالَ حَدَّثَنَا ضُبَارَةُ، عَنْ دُوَيْدِ بْنِ نَافِعٍ، قَالَ قَالَ أَبُو صَالِحٍ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَدْعُو ‏ "‏ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الشِّقَاقِ وَالنِّفَاقِ وَسُوءِ الأَخْلاَقِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Hurairah said:"The Messenger of Allah [SAW] used to say in his supplication: 'Allahumma inni a'udhu bika minash-shiqaqi wan-nifaqi, wa suw'il-akhlaq (O Allah, I seek refuge with You from opposing the truth, hypocrisy and bad manners)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।