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सुनन नसाई

नंबर 5454

नंबर 5454किताब 50, नंबर 27
أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ بْنِ أَبِي صَفْوَانَ، قَالَ حَدَّثَنِي سَلَمَةُ بْنُ سَعِيدِ بْنِ عَطِيَّةَ، - وَكَانَ خَيْرَ أَهْلِ زَمَانِهِ - قَالَ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَكْثَرَ مَا يَتَعَوَّذُ مِنَ الْمَغْرَمِ وَالْمَأْثَمِ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا أَكْثَرَ مَا تَتَعَوَّذُ مِنَ الْمَغْرَمِ قَالَ ‏ "‏ إِنَّهُ مَنْ غَرِمَ حَدَّثَ فَكَذَبَ وَوَعَدَ فَأَخْلَفَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that 'Aishah said:"The Messenger of Allah [SAW] often used to seek refuge (with Allah) from debt and sin. I said: 'O Messenger of Allah, how often you seek refuge from debt!' He said: 'Whoever gets into debt speaks and lies, and makes a promise and breaks it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।