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सुनन नसाई

नंबर 5452

नंबर 5452किताब 50, नंबर 25
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى الصَّنْعَانِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقُولُ ‏ "‏ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْعَجْزِ وَالْكَسَلِ وَالْهَرَمِ وَالْبُخْلِ وَالْجُبْنِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ وَمِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Anas that:The Prophet [SAW] used to say: "Allahumma inni a'udhu bika minal-'ajzi, wal-kasali, wal-harami, wal-bukhli, wal-jubni, wa 'audhu bika min 'adhabil-qabri, wa min fitnatil-mahya wal-mamati (O Allah, I seek refuge in You from incapacity, laziness, old age, miserliness and cowardice, and I seek refuge in You from the torment of the grave, and from the trials of life and death)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।