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सुनन नसाई

नंबर 5442

नंबर 5442किताब 50, नंबर 15
أَخْبَرَنَا يَزِيدُ بْنُ سِنَانٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، قَالَ أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي سِنَانٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي الْهُذَيْلِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَتَعَوَّذُ مِنْ أَرْبَعٍ مِنْ عِلْمٍ لاَ يَنْفَعُ وَمِنْ قَلْبٍ لاَ يَخْشَعُ وَدُعَاءٍ لاَ يُسْمَعُ وَنَفْسٍ لاَ تَشْبَعُ ‏.‏
It was narrated from 'Abdullah bin Amr that:The Prophet [SAW] used to seek refuge (with Allah) from four things: From knowledge that is of no benefit, from a heart that does not feel humble, from a supplication that is not heard, and a soul that is never satisfied
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।