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सुनन नसाई

नंबर 5440

नंबर 5440किताब 50, नंबर 13
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، قَالَ حَدَّثَنَا قَيْسٌ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ أُنْزِلَ عَلَىَّ آيَاتٌ لَمْ يُرَ مِثْلُهُنَّ ‏{‏ قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ ‏}‏ إِلَى آخِرِ السُّورَةِ وَ ‏{‏ قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ ‏}‏ ‏"‏ ‏.‏ إِلَى آخِرِ السُّورَةِ ‏.‏
It was narrated from 'Uqbah bin 'Amir that:The Prophet [SAW] said: "There have been revealed to me Verses the like of which has never been seen: 'Say: I seek refuge with (Allah) the Lord of the daybreak...' to the end of the Surah, and 'Say: I seek refuge with (Allah) the Lord of mankind...' to the end of the Surah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 50 · The Book of Seeking Refuge with Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।