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सुनन नसाई

नंबर 491

नंबर 491किताब 5, नंबर 44
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، عَنْ يَحْيَى، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ، قَالَ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي عَلَى دَابَّتِهِ وَهُوَ مُقْبِلٌ مِنْ مَكَّةَ إِلَى الْمَدِينَةِ وَفِيهِ أُنْزِلَتْ ‏{‏ فَأَيْنَمَا تُوَلُّوا فَثَمَّ وَجْهُ اللَّهِ ‏}‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Umar said:"The Messenger of Allah (ﷺ) used to pray while on his animal when he was coming back from Makkah to Madinah. Concerning this, the verse was revealed: So wherever you turn (yourselves or your faces) there is the Face of Allah.'" [1] [1] Al-Baqarah 2:
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Salah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।