सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 488

नंबर 488किताब 5, नंबर 41
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو إِسْحَاقَ، عَنِ الْبَرَاءِ، قَالَ صَلَّيْنَا مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نَحْوَ بَيْتِ الْمَقْدِسِ سِتَّةَ عَشَرَ شَهْرًا أَوْ سَبْعَةَ عَشَرَ شَهْرًا - شَكَّ سُفْيَانُ - وَصُرِفَ إِلَى الْقِبْلَةِ ‏.‏
It was narrated that Al-Bara' said:"We prayed toward Bait Al-Maqdis (Jerusalem) with the Messenger of Allah (ﷺ) for sixteen or seventeen months - Safwan was not sure - then it was changed to the Qiblah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Salah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।