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सुनन नसाई

नंबर 484

नंबर 484किताब 5, नंबर 37
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ يَزِيدَ، قَالَ حَدَّثَنَا بَهْزُ بْنُ أَسَدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا سَلَمَةُ بْنُ كُهَيْلٍ، قَالَ سَمِعْتُ سَعِيدَ بْنَ جُبَيْرٍ، قَالَ رَأَيْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ صَلَّى بِجَمْعٍ فَأَقَامَ فَصَلَّى الْمَغْرِبَ ثَلاَثًا ثُمَّ صَلَّى الْعِشَاءَ رَكْعَتَيْنِ ثُمَّ قَالَ هَكَذَا رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَصْنَعُ فِي هَذَا الْمَكَانِ ‏.‏
Salamah bin Kuhail narrated:"I heard Sa'eed bin Jubair say: 'I saw 'Abdullah bin 'Umar pray in Jam'; he made the Iqamah and prayed Maghrib, three Rak'ahs, then he prayed 'Isha', two Rak'ahs, then he said: 'This is what I saw the Messenger of Allah (ﷺ) do in this place
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Salah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।