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सुनन नसाई

नंबर 476

नंबर 476किताब 5, नंबर 29
أَخْبَرَنَا سُوَيْدُ بْنُ نَصْرٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ، عَنْ أَبِي عَوَانَةَ، عَنْ مَنْصُورِ بْنِ زَاذَانَ، عَنِ الْوَلِيدِ أَبِي بِشْرٍ، عَنْ أَبِي الْمُتَوَكِّلِ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُومُ فِي الظُّهْرِ فَيَقْرَأُ قَدْرَ ثَلاَثِينَ آيَةً فِي كُلِّ رَكْعَةٍ ثُمَّ يَقُومُ فِي الْعَصْرِ فِي الرَّكْعَتَيْنِ الأُولَيَيْنِ قَدْرَ خَمْسَ عَشْرَةَ آيَةً ‏.‏
It was narrated that Abu Sa'eed Al-Khudri said:"The Messenger of Allah (ﷺ) used to stand in Zuhr and recite the equivalent of thirty verses in each Rak'ah, then in the first two Rak'ahs of 'Asr he would stand for the equivalent of fifteen verses
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Salah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।