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सुनन नसाई

नंबर 452

नंबर 452किताब 5, नंबर 5
أَخْبَرَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ دَاوُدَ، عَنِ ابْنِ وَهْبٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ الْحَارِثِ، أَنَّ عَبْدَ رَبِّهِ بْنَ سَعِيدٍ، حَدَّثَهُ أَنَّ الْبُنَانِيَّ حَدَّثَهُ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّ الصَّلَوَاتِ، فُرِضَتْ بِمَكَّةَ وَأَنَّ مَلَكَيْنِ أَتَيَا رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَذَهَبَا بِهِ إِلَى زَمْزَمَ فَشَقَّا بَطْنَهُ وَأَخْرَجَا حَشْوَهُ فِي طَسْتٍ مِنْ ذَهَبٍ فَغَسَلاَهُ بِمَاءِ زَمْزَمَ ثُمَّ كَبَسَا جَوْفَهُ حِكْمَةً وَعِلْمًا ‏.‏
It was narrated from Anas bin Malik that the prayers were enjoined in Makkah, and that two angels came to the Messenger of Allah (ﷺ) and took him to Zamzam, where they split open his stomach and took out his innards in a basin of gold, and washed them with Zamzam water, then they filled his heart with wisdom and knowledge
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 5 · The Book of Salah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।