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सुनन नसाई

नंबर 5354

नंबर 5354किताब 48, नंबर 315
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الْقَاسِمِ، عَنِ الْقَاسِمِ، يُحَدِّثُ عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كَانَ فِي بَيْتِي ثَوْبٌ فِيهِ تَصَاوِيرُ فَجَعَلْتُهُ إِلَى سَهْوَةٍ فِي الْبَيْتِ فَكَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي إِلَيْهِ ثُمَّ قَالَ ‏ "‏ يَا عَائِشَةُ أَخِّرِيهِ عَنِّي ‏"‏ ‏.‏ فَنَزَعْتُهُ فَجَعَلْتُهُ وَسَائِدَ ‏.‏
It was narrated that 'Aishah said:"In my house there was a cloth on which were images, which I put in a niche of the house, and the Messenger of Allah [SAW] used to pray facing it. Then he said: 'O 'Aishah, take it away from me.' So I took it down and made it into pillows
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · The Book of Adornment

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।