सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 5209

नंबर 5209किताब 48, नंबर 170
أَخْبَرَنَا مُجَاهِدُ بْنُ مُوسَى الْخُوَارَزْمِيُّ، بِبَغْدَادَ قَالَ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، قَالَ أَنْبَأَنَا الْعَوَّامُ بْنُ حَوْشَبٍ، عَنْ أَزْهَرَ بْنِ رَاشِدٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ تَسْتَضِيئُوا بِنَارِ الْمُشْرِكِينَ وَلاَ تَنْقُشُوا عَلَى خَوَاتِيمِكُمْ عَرَبِيًّا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Anas bin Malik said:"The Messenger of Allah [SAW] said: 'Do not be so close to the Mushrikin that you can benefit from the light of their fires, and do not engrave Arabic (words) on your rings
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · The Book of Adornment

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।