أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَلِيِّ بْنِ مَيْمُونٍ، قَالَ حَدَّثَنَا الْقَعْنَبِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ ابْنَ عُمَرَ، كَانَ يَصْبُغُ ثِيَابَهُ بِالزَّعْفَرَانِ فَقِيلَ لَهُ فَقَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَصْبُغُ .
Abdullah bin Zaid narrated from his father that:Ibn 'Umar used to dye his garments with saffron. He was asked about that and he said: "The Messenger of Allah [SAW] used to dye his clothes (with it)
स्रोत में दर्ज दर्जे
Sahih IsnaadAbu Ghuddah
Sahih IsnaadAl-Albani
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।