أَخْبَرَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ يَعْقُوبَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو زَيْدٍ، سَعِيدُ بْنُ الرَّبِيعِ قَالَ حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُبَارَكِ، قَالَ سَمِعْتُ كَرِيمَةَ، قَالَتْ سَمِعْتُ عَائِشَةَ، سَأَلَتْهَا امْرَأَةٌ عَنِ الْخِضَابِ، بِالْحِنَّاءِ قَالَتْ لاَ بَأْسَ بِهِ وَلَكِنْ أَكْرَهُ هَذَا لأَنَّ حِبِّي صلى الله عليه وسلم كَانَ يَكْرَهُ رِيحَهُ . تَعْنِي النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم .
Karimah said:"I heard a woman asking 'Aishah about dyeing the hair with Henna. She said: 'There is nothing wrong with it, but I do not like to do it because my beloved- meaning the Prophet [SAW]- disliked its smell
स्रोत में दर्ज दर्जे
DaifAbu Ghuddah
DaifAl-Albani
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।