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सुनन नसाई

नंबर 5065

नंबर 5065किताब 48, नंबर 26
أَخْبَرَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ الْمُسْتَمِرِ الْعُرُوقِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا الصَّلْتُ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا غَسَّانُ بْنُ الأَغَرِّ بْنِ حُصَيْنٍ النَّهْشَلِيُّ، قَالَ حَدَّثَنِي عَمِّي، زِيَادُ بْنُ الْحُصَيْنِ عَنْ أَبِيهِ، قَالَ لَمَّا قَدِمَ عَلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِالْمَدِينَةِ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ ادْنُ مِنِّي ‏"‏ ‏.‏ فَدَنَا مِنْهُ فَوَضَعَ يَدَهُ عَلَى ذُؤَابَتِهِ ثُمَّ أَجْرَى يَدَهُ وَسَمَّتَ عَلَيْهِ وَدَعَا لَهُ ‏.‏
Ziyad bin Al-Husain narrated that his father said:"When he came to the Prophet [SAW] in Al-Madinah, the Messenger of Allah [SAW] said to him: 'Come closer to me.' So he came closer to him, and he put his hand on his braid and wiped his head and prayed for him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · The Book of Adornment

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।