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सुनन नसाई

नंबर 5022

नंबर 5022किताब 47, नंबर 38
أَخْبَرَنَا وَاصِلُ بْنُ عَبْدِ الْأَعْلَى قَالَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ عَنْ الْأَعْمَشِ عَنْ عَدِيِّ بْنِ ثَابِتٍ عَنْ زِرِّ بْنِ حُبَيْشٍ عَنْ عَلِيٍّ قَالَ عَهِدَ إِلَيَّ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَنْ لَا يُحِبُّنِي إِلَّا مُؤْمِنٌ وَلَا يَبْغُضُنِي إِلَّا مُنَافِقٌ
It was narrated that 'Ali said:"The Prophet [SAW] made a covenant with me that none would love me but a believer, and none would hate me but a hypocrite
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · The Book Of Faith and its Signs

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।