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सुनन नसाई

नंबर 4941

नंबर 4941किताब 46, नंबर 71
أَخْبَرَنَا سُوَيْدُ بْنُ نَصْرٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ اللَّهِ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ لَمْ تُقْطَعْ يَدُ سَارِقٍ فِي أَدْنَى مِنْ حَجَفَةٍ أَوْ تُرْسٍ وَكُلُّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا ذُو ثَمَنٍ ‏.‏
It was narrated that 'Aishah said:"The hand of the thief should not be cut off for anything less than a Hajafah or a Turs (two kinds of shields)," each of which was worth a (decent) price
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 46 · The Book of Cutting off the Hand of the Thief

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।