सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 4928

नंबर 4928किताब 46, नंबर 59
أَخْبَرَنَا أَبُو صَالِحٍ، مُحَمَّدُ بْنُ زُنْبُورٍ قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ مُحَمَّدٍ، عَنْ عَمْرَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّهَا سَمِعَتْ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ لاَ يُقْطَعُ السَّارِقُ إِلاَّ فِي رُبُعِ دِينَارٍ فَصَاعِدًا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Aishah that:she heard the Messenger of Allah say: "The hand of the thief is not be cut off except for one-quarter of a Dinar or more
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 46 · The Book of Cutting off the Hand of the Thief

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।