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सुनन नसाई

नंबर 4696

नंबर 4696किताब 44, नंबर 248
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَاقَ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ ابْنِ عُلَيَّةَ، عَنْ يُونُسَ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ فَرُّوخَ، عَنْ عُثْمَانَ بْنِ عَفَّانَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَدْخَلَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ رَجُلاً كَانَ سَهْلاً مُشْتَرِيًا وَبَائِعًا وَقَاضِيًا وَمُقْتَضِيًا الْجَنَّةَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that 'Uthman bin 'Affan said:"The Messenger of Allah said: 'Allah, the Mighty and Sublime, admitted to paradise a man who was easygoing in buying and selling, in paying off debts and asking for repayment."' (Sahaih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAbu Ghuddah
  • HasanAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।