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सुनन नसाई

नंबर 4689

नंबर 4689किताब 44, नंबर 241
أَخْبَرَنِي مُحَمَّدُ بْنُ آدَمَ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ، عَنْ وَبْرِ بْنِ أَبِي دُلَيْلَةَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ مَيْمُونٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ الشَّرِيدِ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَىُّ الْوَاجِدِ يُحِلُّ عِرْضَهُ وَعُقُوبَتَهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Amr bin Ash-Sharid, that his father said:"The Messenger of Allah said: 'if one who can afford it delay repayment, his honor and punishment become permissible
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAbu Ghuddah
  • HasanAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।