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सुनन नसाई

नंबर 4681

नंबर 4681किताब 44, नंबर 233
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ دَاوُدَ، قَالَ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَوْنٍ، قَالَ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ مُوسَى بْنِ السَّائِبِ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ سَمُرَةَ، قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الرَّجُلُ أَحَقُّ بِعَيْنِ مَالِهِ إِذَا وَجَدَهُ وَيَتْبَعُ الْبَائِعُ مَنْ بَاعَهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Sammurah that the Messenger of Allah said:"A man has more right to his own wealth when he finds it, and the buyer should pursue the one who sold it to him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAbu Ghuddah
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।