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सुनन नसाई

नंबर 4677

नंबर 4677किताब 44, नंबर 229
أَخْبَرَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ خَالِدٍ، وَإِبْرَاهِيمُ بْنُ الْحَسَنِ، - وَاللَّفْظُ لَهُ - قَالَ حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالَ قَالَ ابْنُ جُرَيْجٍ أَخْبَرَنِي ابْنُ أَبِي حُسَيْنٍ، أَنَّ أَبَا بَكْرِ بْنَ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرِو بْنِ حَزْمٍ، أَخْبَرَهُ أَنَّ عُمَرَ بْنَ عَبْدِ الْعَزِيزِ حَدَّثَهُ عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ حَدِيثِ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم عَنِ الرَّجُلِ، يُعْدِمُ إِذَا وُجِدَ عِنْدَهُ الْمَتَاعُ بِعَيْنِهِ وَعَرَفَهُ أَنَّهُ لِصَاحِبِهِ الَّذِي بَاعَهُ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah from the Prophet, that:if a man becomes bankrupt, then a specific item is found with him, and is recognized, then it belongs to the one who sold it to him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।