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सुनन नसाई

नंबर 4646

नंबर 4646किताब 44, नंबर 198
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ زُرَارَةَ، قَالَ أَنْبَأَنَا إِسْمَاعِيلُ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الشُّفْعَةُ فِي كُلِّ شِرْكٍ رَبْعَةٍ أَوْ حَائِطٍ لاَ يَصْلُحُ لَهُ أَنْ يَبِيعَ حَتَّى يُؤْذِنَ شَرِيكَهُ فَإِنْ بَاعَ فَهُوَ أَحَقُّ بِهِ حَتَّى يُؤْذِنَهُ ‏"‏ ‏.‏
it was narrated that Jabir said:"The Messenger of Allah said: 'Pre-emption is to be given in everything that is shared, whether it is a house or a garden. It is not right to sell it before informing one's partner, and if he sells it he (the partner) has more right to it, unless he gives Permission to sell it to someone else
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।