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सुनन नसाई

नंबर 4631

नंबर 4631किताब 44, नंबर 183
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، قَالَ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، قَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ سَلَفٍ وَبَيْعٍ وَعَنْ شَرْطَيْنِ فِي بَيْعٍ وَاحِدٍ وَعَنْ بَيْعِ مَا لَيْسَ عِنْدَكَ وَعَنْ رِبْحِ مَا لَمْ يُضْمَنْ ‏.‏
It was narrated from 'Amr bin Shu'aib, from his father, that his grandfather said:"The Messenger of Allah forbade lending on the condition of a sale, selling what you do not have, and profiting on what you do not possess
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAbu Ghuddah
  • Hasan SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।