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सुनन नसाई

नंबर 4613

नंबर 4613किताब 44, नंबर 165
حَدَّثَنَا زِيَادُ بْنُ أَيُّوبَ، قَالَ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو بِشْرٍ، عَنْ يُوسُفَ بْنِ مَاهَكَ، عَنْ حَكِيمِ بْنِ حِزَامٍ، قَالَ سَأَلْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ يَأْتِينِي الرَّجُلُ فَيَسْأَلُنِي الْبَيْعَ لَيْسَ عِنْدِي أَبِيعُهُ مِنْهُ ثُمَّ أَبْتَاعُهُ لَهُ مِنَ السُّوقِ ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ لاَ تَبِعْ مَا لَيْسَ عِنْدَكَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Hakim bin Hizam said:"I asked the Prophet "O Messenger of Allah, a man may come to me and ask me to sell him something that I do not have. Can I sell it to him then go and buy it from the market?' He said: 'Do not sell what you do not have
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।