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सुनन नसाई

नंबर 4611

नंबर 4611किताब 44, नंबर 163
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، وَحُمَيْدُ بْنُ مَسْعَدَةَ، عَنْ يَزِيدَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ يَحِلُّ سَلَفٌ وَبَيْعٌ وَلاَ شَرْطَانِ فِي بَيْعٍ وَلاَ بَيْعُ مَا لَيْسَ عِنْدَكَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from'Amr bin Shu'aib, from his father that his grandfather, Said:that the Messenger of Allah said: "It is not permissible to lend on the condition of a sale, or to have two conditions in one transaction, or to sell what you do not have." (Sahih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAbu Ghuddah
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।