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सुनन नसाई

नंबर 4588

नंबर 4588किताब 44, नंबर 140
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، قَالَ حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ نَافِعٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، بِمِثْلِهِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ كَذَا وَجَدْتُهُ فِي هَذَا الْمَوْضِعِ ‏.‏
Something similar was narrated form Saeed bin Jubair. Abu 'Abdur-Rehman (An-Nasai) said:This is what I have found on this topic
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।