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सुनन नसाई

नंबर 4574

नंबर 4574किताब 44, नंबर 126
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَحْبُوبٍ، قَالَ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، قَالَ أَنْبَأَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ خَالِدِ بْنِ أَبِي عِمْرَانَ، عَنْ حَنَشٍ الصَّنْعَانِيِّ، عَنْ فَضَالَةَ بْنِ عُبَيْدٍ، قَالَ أَصَبْتُ يَوْمَ خَيْبَرَ قِلاَدَةً فِيهَا ذَهَبٌ وَخَرَزٌ فَأَرَدْتُ أَنْ أَبِيعَهَا فَذُكِرَ ذَلِكَ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ افْصِلْ بَعْضَهَا مِنْ بَعْضٍ ثُمَّ بِعْهَا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Fadalah bin 'Ubad said:"On the Day of Khaibar I got a necklace containing gold and gems, and I wanted to sell it. Mention of that was made to the Prophet and he said: 'Take it apart, and then sell it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।