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सुनन नसाई

नंबर 4533

नंबर 4533किताब 44, नंबर 85
أَخْبَرَنِي زِيَادُ بْنُ أَيُّوبَ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى عَنِ الْمُزَابَنَةِ وَالْمُزَابَنَةُ أَنْ يُبَاعَ مَا فِي رُءُوسِ النَّخْلِ بِتَمْرٍ بِكَيْلٍ مُسَمًّى إِنْ زَادَ لِي وَإِنْ نَقَصَ فَعَلَىَّ ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Umar that:the Messenger of Allah forbade Muzabanah. Ad Muzabanah is when what is art the tops of the trees is sold for a certain amount f dried dates; if there are more then I gain, and if there are less the I lose
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • Sahih HadithAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।