सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 4481

नंबर 4481किताब 44, नंबर 33
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ قَتَادَةَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ سَمُرَةَ، أَنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الْبَيِّعَانِ بِالْخِيَارِ حَتَّى يَتَفَرَّقَا أَوْ يَأْخُذَ كُلُّ وَاحِدٍ مِنْهُمَا مِنَ الْبَيْعِ مَا هَوِيَ وَيَتَخَايَرَانِ ثَلاَثَ مَرَّاتٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Al_Hasan, from Samurah, that the Prophet of Allah said:"Two trades have the choice as long as until they reach a deal that suits both of them and they confirm it three times
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।