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सुनन नसाई

नंबर 4467

नंबर 4467किताब 44, नंबर 19
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَلِيٍّ الْمَرْوَزِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحْرِزُ بْنُ الْوَضَّاحِ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الْمُتَبَايِعَانِ بِالْخِيَارِ مَا لَمْ يَفْتَرِقَا إِلاَّ أَنْ يَكُونَ الْبَيْعُ كَانَ عَنْ خِيَارٍ فَإِنْ كَانَ الْبَيْعُ عَنْ خِيَارٍ فَقَدْ وَجَبَ الْبَيْعُ ‏"‏ ‏.‏
it was narrated from Ismail, from Nafi, that Ibn 'Umar said:"The Messenger of Allah said: 'The two parties to a transaction both have the choice so long as they have not separated, unless they have both chosen to conclude they transaction. If they have both chosen to conclude the transaction, then the transaction is binding." (Sahih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · The Book of Financial Transactions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।