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सुनन नसाई

नंबर 4445

नंबर 4445किताब 43, नंबर 85
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَمْرٍو، عَنْ صُهَيْبٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، يَرْفَعُهُ قَالَ ‏"‏ مَنْ قَتَلَ عُصْفُورًا فَمَا فَوْقَهَا بِغَيْرِ حَقِّهَا سَأَلَ اللَّهُ عَزَّ جَلَّ عَنْهَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ‏"‏ ‏.‏ قِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ فَمَا حَقُّهَا قَالَ ‏"‏ حَقُّهَا أَنْ تَذْبَحَهَا فَتَأْكُلَهَا وَلاَ تَقْطَعْ رَأْسَهَا فَيُرْمَى بِهَا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Abdullah bin 'Amr, who attributed it to the Messenger of Allah:"There is no person who kills a small bird or anything larger, for no just reason, but Allah will ask him about it." It was said: "O Messenger of Allah, what does 'just reason mean?" He said: "That you slaughters it and eat it, and o not cut off its head and throw it aside
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of ad-Dahaya (Sacrifices)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।