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सुनन नसाई

नंबर 4403

नंबर 4403किताब 43, नंबर 43
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عُمَرَ بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَبَايَةَ بْنِ رِفَاعَةَ، عَنْ رَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَا أَنْهَرَ الدَّمَ وَذُكِرَ اسْمُ اللَّهِ فَكُلْ إِلاَّ بِسِنٍّ أَوْ ظُفْرٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Rafi bin Khadij that the Messenger of Allah said:"If the blood is shed and the name of Allah is mentioned, then eat, unless (it is slaughtered) with teeth or nails
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of ad-Dahaya (Sacrifices)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।