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सुनन नसाई

नंबर 4380

नंबर 4380किताब 43, नंबर 20
أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ دُرُسْتَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو إِسْمَاعِيلَ، - وَهُوَ الْقَنَّادُ - قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنِي بَعْجَةُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَسَّمَ بَيْنَ أَصْحَابِهِ ضَحَايَا فَصَارَتْ لِي جَذَعَةٌ فَقُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ صَارَتْ لِي جَذَعَةٌ ‏.‏ فَقَالَ ‏ "‏ ضَحِّ بِهَا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Uqbah bin 'Amir that:the Messenger of Allah divided some sacrificial animals among his Companions, and I got a Jadh'ah sheep. I said: 'O Messenger of Allah, I got a Jadh'ah sheep.' He said: 'Sacrifice it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of ad-Dahaya (Sacrifices)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।