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सुनन नसाई

नंबर 4367

नंबर 4367किताब 43, नंबर 7
أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ عُثْمَانَ النُّفَيْلِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ عِيسَى، قَالَ حَدَّثَنَا الْمُفَضَّلُ بْنُ فَضَالَةَ، قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنِي نَافِعٌ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نَحَرَ يَوْمَ الأَضْحَى بِالْمَدِينَةِ - قَالَ - وَقَدْ كَانَ إِذَا لَمْ يَنْحَرْ يَذْبَحُ بِالْمُصَلَّى ‏.‏
It was narrated from 'Abdullah bin 'Umar that:the Messenger of Allah offered the sacrifice obn the Day of Sacrifice in Al-Madinah. He said: "if he did not offer the Nahr (sacrifice a camel) he would have offered Dhabihah (Sacrificed a sheep) at the prayer place
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of ad-Dahaya (Sacrifices)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।