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सुनन नसाई

नंबर 4361

नंबर 4361किताब 43, नंबर 1
أَخْبَرَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ سَلْمٍ الْبَلْخِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا النَّضْرُ، - وَهُوَ ابْنُ شُمَيْلٍ - قَالَ أَنْبَأَنَا شُعْبَةُ، عَنْ مَالِكِ بْنِ أَنَسٍ، عَنِ ابْنِ مُسْلِمٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ رَأَى هِلاَلَ ذِي الْحِجَّةِ فَأَرَادَ أَنْ يُضَحِّيَ فَلاَ يَأْخُذْ مِنْ شَعْرِهِ وَلاَ مِنْ أَظْفَارِهِ حَتَّى يُضَحِّيَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ummm Salamah that the Prophet said:"Whoever sees the new crescent of Dhul-Hijjah and wants to offer a sacrifice, let him not remove any of his hair or nails until he has offered the sacrifice
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · The Book of ad-Dahaya (Sacrifices)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।