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सुनन नसाई

नंबर 4355

नंबर 4355किताब 42, नंबर 93
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي فُدَيْكٍ، عَنِ ابْنِ أَبِي ذِئْبٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ خَالِدٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عُثْمَانَ، أَنَّ طَبِيبًا، ذَكَرَ ضِفْدَعًا فِي دَوَاءٍ عِنْدَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَنَهَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ قَتْلِهِ ‏.‏
It was narrated from 'Abdur-Rahman bin 'Uthman that:a physician made mention of the use of frogs in a remedy in the presence of the Messenger of Allah and the Messengher of Allah forbade killing them. (sahih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 42 · The Book of Hunting and Slaughtering

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।