सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 4240

नंबर 4240किताब 41, नंबर 19
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ أَبِي رِزْمَةَ، قَالَ أَنْبَأَنَا الْفَضْلُ بْنُ مُوسَى، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أَبِي خَالِدٍ، عَنِ الشَّعْبِيِّ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنْ سَوْدَةَ، زَوْجِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَتْ مَاتَتْ شَاةٌ لَنَا فَدَبَغْنَا مَسْكَهَا فَمَازِلْنَا نَنْبِذُ فِيهَا حَتَّى صَارَتْ شَنًّا ‏.‏
It was narrated that Sawdah, the wife of the Prophet, said:"A sheep of ours died, and we tanned its skin, and continued to make Nabidh in it until it wore out
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 41 · The Book of al-Fara' and al-'Atirah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।