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सुनन नसाई

नंबर 4228

नंबर 4228किताब 41, नंबर 7
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ، عَنِ ابْنِ عَوْنٍ، قَالَ حَدَّثَنَا جَمِيلٌ، عَنْ أَبِي الْمَلِيحِ، عَنْ نُبَيْشَةَ، قَالَ ذُكِرَ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ كُنَّا نَعْتِرُ فِي الْجَاهِلِيَّةِ ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ اذْبَحُوا لِلَّهِ عَزَّ وَجَلَّ فِي أَىِّ شَهْرٍ مَا كَانَ وَبَرُّوا اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ وَأَطْعِمُوا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Nubaishah said:"It was said to the prophet: 'During the Jahiliyyah we used to offer the 'Atirah.' He said: 'Slaughter for the sake of Allah, the Mighty and sublime, no matter what month it is; do good for the sake of Allah, the Mighty and sublime, and feed the poor
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 41 · The Book of al-Fara' and al-'Atirah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।